HSSC Veterinary Services Haryana: हरियाणा में झोलाछाप पशु इलाज पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार को 30 दिन में ठोस एक्शन का आदेश
HSSC Veterinary Services Haryana: पशु चिकित्सा सेवाओं की अव्यवस्था पर कोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप, जन स्वास्थ्य और पशुधन अर्थव्यवस्था को बताया खतरे में
HSSC Veterinary Services Haryana: हरियाणा में तेजी से बढ़ रही झोलाछाप पशु चिकित्सा सेवाओं पर अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस पूरे मुद्दे को न सिर्फ पशुओं के जीवन से जुड़ा बताया, बल्कि इसे जन स्वास्थ्य और राज्य की पशुधन अर्थव्यवस्था के लिए खतरा भी करार दिया।
कोर्ट ने क्या कहा? (Punjab Haryana High Court Animal Health Order)
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस गंभीर मसले पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को 30 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई करने का आदेश दिया है। यह आदेश हरियाणा पशु चिकित्सक महासंघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित हुआ।
विषय विवरण
- याचिकाकर्ता- हरियाणा पशु चिकित्सक महासंघ
- मुख्य मुद्दा- झोलाछाप इलाज और वी.एल.डी.ए. की मनमानी
- कानूनी संदर्भ – भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 की धारा 30 का उल्लंघन
- कोर्ट का निर्देश- 18 जून 2018 को दिए गए ज्ञापन पर 30 दिन में निर्णय दे सरकार
जमीनी हकीकत: एक डॉक्टर पर कई डिपेंसरियां, बिना निगरानी चल रहा इलाज ( V.L.D.A. कानून उल्लंघन)
राज्य में हजारों वी.एल.डी.ए. (Veterinary Livestock Development Assistants) पशु चिकित्सकों की अनुपस्थिति में स्वतंत्र रूप से इलाज कर रहे हैं। जबकि कानूनन उन्हें सिर्फ पंजीकृत डॉक्टर की निगरानी में प्राथमिक सेवाएं देने की अनुमति है।
(HC Fake doctor)लेकिन व्यवहार में एक डॉक्टर पर 30–40 किमी के दायरे में 4–5 डिस्पेंसरियों की जिम्मेदारी डाल दी गई है, जिससे निरीक्षण नाममात्र का रह गया है।
इस शिथिल व्यवस्था ने झोलाछाप टीकाकरण, बधियाकरण और इलाज को जन्म दे दिया है — जो कि बिना प्रशिक्षण और कानूनी अधिकार के चल रहे हैं।
इसका असर सिर्फ पशुओं पर नहीं
यह सिर्फ पशुओं की सेहत का सवाल नहीं है – यह मानव स्वास्थ्य, डेयरी उद्योग, और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार है। संक्रमित पशु उत्पादों के ज़रिए बीमारियाँ इंसानों में भी फैल सकती हैं, जिससे जन स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।
याचिकाकर्ता की बात: कई बार शिकायत करने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई ( HSSC Veterinary Services Haryana)
महासंघ के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस विषय पर कई ज्ञापन, पत्र और शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे तंग आकर हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।
आगे क्या?
कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि 2018 के ज्ञापन पर विचार कर 30 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण सहित निर्णय लिया जाए, और इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए।
निष्कर्ष
इस मुद्दे ने न सिर्फ कानून के उल्लंघन, बल्कि पशु जीवन, जन स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असलियत को उजागर किया है। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप बताता है कि अब सिर्फ लापरवाही नहीं चलेगी — सरकार को एक्शन लेना ही होगा, और जनता को सुरक्षित पशु चिकित्सा सेवाएं दिलवानी होंगी।