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National Electricity Policy-2026: महंगी होगी बिजली, अब लागत से कम पर नहीं बेची जा सकेगी बिजली, सभी प्रकार की सब्सिडी होंगी खत्म

National Electricity Policy-2026 का मसौदा जारी, क्रास सब्सिडी खत्म करने का दिखाया गया रोडमैप

दिल्ली: सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि अभी बिजली सेक्टर में जिस तरह से सब्सिडी दी जा रही है और मुफ्त बिजली की राजनीति हो रही है, वह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगी।

इसी तरह उद्योग जगत को महंगी बिजली बेचकर कुछ दूसरे वर्ग को लागत से भी कम कीमत पर बिजली देने की परंपरा पर भी विराम लगेगा। इस बात की जानकारी बुधवार को बिजली मंत्रालय की तरफ से जारी राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनईपी) 2026 के मसौदे में दी गई है। यह मसौदा बिजली संशोधन विधेयक, 2026 का आधार बनेगा। इस पर केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल देश के सभी राज्यों के बिजली मंत्रियों या राज्य सचिवों के साथ विमर्श करेंगे।

 

एनईपी-2026 ने विजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) की वित्तीय सेहत बहाल करने और अत्यधिक क्रास सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने पर जोर दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि अगर कोई राज्य सरकार बिजली सब्सिडी देती है तो उसके लिए बजट में पहले से प्रविधान करना होगा। इसका मुख्य फोकस लागत-आधारित टैरिफ लागू करने का है ताकि डिस्काम कर्ज के चक्र से बाहर निकल सकें। एनईपी 2005 में आपूर्ति लागत वसूली और लक्षित सब्सिडी का प्रविधान था लेकिन टैरिफ को आपूर्ति लागत से नीचे रखने से डिस्काम कर्ज के जाल में फंसती चली गईं।

देश की सभी डिस्काम पर कुल 7.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और इनकी कुल हानि की राशि 6.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की हो चुकी है।

इसके मुताबिक यदि राज्यों के बिजली नियामक आयोग टैरिफ आदेश जारी नहीं करते हैं तब भी बिजली टैरिफ को स्वचालित वार्षिक संशोधन सूचकांक से जोड़ते हुए बढ़ा दिया जाएगा। किसी भी स्थिति में बिजली की दर स्थिर लागत से कम नहीं होने की बात कही गई है.

डिस्काम को किसी खास क्षेत्र में बिजली देने की अनिवार्यता से मिलेगी छूट

मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री, रेलवे और मेट्रो रेलवे पर क्रास सब्सिडी व सरचार्ज से छूट का भी प्रस्ताव है ताकि भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढे और लाजिस्टिक लागत घटे।

हालांकि एक मेगावाट और इससे अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन से छूट की बात कही गई है। यानी इस श्रेणी के ग्राहक किसी भी बिजली वितरण कंपनी से बिजली खरीद सकेंगे।

साथ ही डिस्काम पर किसी खास क्षेत्र को अनिवार्य तौर पर बिजली देने की शर्त नहीं होगी। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि निजी कंपनियों को यूनिवर्सल सप्लाई आब्लिगेशन से मुक्ति मिल जाती है तो वो सिर्फ लाभ वाले क्षेत्रों में बिजली देगी व ग्रामीण, कृषि तथा गरीब उपभोक्ताओं को नजरअंदाज करेंगी।

हालांकि, मसौदे में दावा किया गया है कि इससे छोटे उपभोक्ताओं की आपूर्ति लागत घटेगी और उद्योग सस्ती बिजली खरीद सकेंगे।

 

 

 

 

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