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Haryana में Collector Rate Process का 1978 के Rules में नहीं है कोई जिक्र, Advocate Hemant का बड़ा खुलासा
No Official Rule for Collector Rate Fixation in Haryana: Major Policy Gap Exposed
पंजाब की तर्ज पर नियमों में संशोधन के लिए प्रदेश सरकार को लिखा – हेमंत
आज 1 अगस्त 2025 से हरियाणा में ताज़ा कलेक्टर रेट होंगे लागू
चंडीगढ़ – गत माह हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के ज़िलों में तैनात उपायुक्तों (डी.सी. ) द्वारा उनके सम्बंधित जिले के अंतर्गत पड़ने वाली सभी तहसीलो और सब-तहसीलों में स्थित अचल संपत्ति (भूमि) के आधिकारिक पंजीकरण हेतु 1 अगस्त 2025 से ताज़ा कलेक्टर रेट लागू किये जाने का नीतिगत निर्णय लिया गया.
इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि कलेक्टर रेट हर जिले के डी.सी. द्वारा अपने ज़िले के कलेक्टर के तौर पर वार्षिक आधार पर निर्धारित एवं अधिसूचित किया जाता है हालांकि वर्ष 2017 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि प्रदेश में कलेक्टर रेट हर छ: माह में एक बार अर्थात वर्ष में दो बार निर्धारित किये जायेगे. छ: वर्ष पूर्व वर्ष 2019 में मनोहर लाल ने हरियाणा विधानसभा सदन में भी बयान दिया था कि प्रदेश में कलेक्टर रेट को फेयर वैल्यू रेट (उचित मूल्य रेट) के नाम से जाना जाएगा. अब तत्कालीन मुख्यमंत्री की उक्त घोषणाओं पर आज तक प्रदेश कितना अमल किया जा रहा है, यह देखने लायक है ?
बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि एक एडवोकेट होने के बावजूद वह आज तक इस मार्फ़त पूर्ण आधिकारिक जानकारी नहीं हासिल कर पाए है कि प्रदेश के हर जिले का डी.सी. जब कलेक्टर के तौर हर वर्ष अपने सम्बंधित जिले का कलेक्टर रेट निर्धारित एवं अधिसूचित करता है, वो वह ऐसा राज्य सरकार द्वारा बनाये किस आधिकारिक नियम या प्रक्रिया के तहत करता है ? इसमें कोई संदेह नहीं कि जिले के डी.सी. को कुछ कानूनों जैसे कि भारतीय स्टाम्प कानून, 1899 के अंतर्गत कलेक्टर के रूप में पर्याप्त शक्तियां प्राप्त है परन्तु जिले में कलेक्टर रेट निर्धारण प्रक्रिया का प्रावधान उक्त स्टाम्प कानून के अंतर्गत हरियाणा सरकार द्वारा बनाये गए प्रासंगिक नियमो में भी अवश्य होना चाहिए जो कि आज तक नहीं डाला गया है.
उन्होंने बताया कि जहाँ तक पडोसी राज्य पंजाब का प्रश्न है तो दिसम्बर,1983 में पंजाब स्टाम्प ( अंडरवैल्यूड इंस्ट्रूमेंट्स सम्बन्धी) नियम बनाये गए थे जिनमें अगस्त, 2002 में पंजाब सरकार द्वारा संशोधन कर उनमें डाले गए नियम 3 ए में जिले के डीसी/कलेक्टर द्वारा अपने अपने जिले में स्थित कृषि/गैर-कृषि भूमि एवं रिहायशी/व्यावसायिक भवन-संपत्ति का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने बाबत पूर्ण प्रक्रिया का उल्लेख है जिसमें यह भी है कि जिला कलेक्टर ऐसा कलेक्टर रेट निर्धारण एक विशेषज्ञों की समिति, जिसमे जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी होंगे के साथ उचित परामर्श से ही करेगा.
हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा भारतीय स्टाम्प कानून, 1899 की उपयुक्त धाराओं में नवम्बर,1978 में बनाये गए हरियाणा स्टाम्प (प्रिवेंशन ऑफ़ अंडर -वैल्यूएशन ऑफ़ इंस्ट्रूमेंट्स ) नियम,1978 में पंजाब के 1983 नियमावली के उपरोक्त नियम 3 ए की तर्ज पर कलेक्टर रेट निर्धारण प्रक्रिया सम्बन्घित नियम नहीं है. अब ऐसा क्यों नहीं किया गया है, इसका कारण राज्य सरकार का राजस्व विभाग ही बता सकता है.
हालांकि वर्ष 2003 में हरियाणा में तत्कालीन चौटाला सरकार द्वारा प्रदेश विधानसभा से संशोधन करवाकर हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 और हरियाणा नगर पालिका कानून, 1973 अर्थात प्रदेश के शहरो/नगरों में लागू होने दोनों नगर निकाय कानूनों कलेक्टर रेट को परिभाषा खंड में शामिल कर दिया था हालांकि गांवों/गैर-शहरी क्षेत्रों में लागू होने वाले हरियाणा पंचायती राज कानून,1994 में वर्तमान में ज़िले के कलेक्टर का तो उल्लेख है परन्तु कलेक्टर रेट का नहीं.
इस सम्बन्ध में हेमंत ने एक आरटीआई याचिका मार्च, 2018 में हरियाणा के राजस्व सचिव (एफसीआर ) कार्यालय में अंडर सेक्रेटरी कम राज्य जन सूचना अधिकारी के समक्ष दायर की जिसके जवाब में उन्हें उपरोक्त हरियाणा स्टाम्प (प्रिवेंशन ऑफ़ अंडर -वैल्यूएशन ऑफ़ इंस्टूरमेंट्स ) नियम,1978 की कॉपी ही दे दी गयी जिसमें कलेक्टर रेट निर्धारण सम्बन्धी प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है. बहरहाल, इसके बाद हेमंत ने हरियाणा सरकार के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त (एफसीआर), राजस्व विभाग को इस विषय पर अभिवेदन भेजकर पंजाब के उपरोक्त वर्णित कलेक्टर रेट निर्धारण प्रक्रिया नियम को हरियाणा के सम्बंधित नियमो में डालने हेतु लिखा हालांकि इस सम्बन्ध में उन्हें न कोई जवाब प्राप्त हुआ और न ही प्रदेश सरकार द्वारा आवश्यक कार्रवाई की गई.
बहरहाल, आज 1 अगस्त 2025 को हेमंत ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के राज्यपाल आशीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह, राजस्व मंत्री विपुल गोयल, प्रदेश की गृह सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा जो प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग (एफ.सी.आर.) की लिंक ऑफिसर भी हैं एवं प्रदेश के सभी 6 मंडलों के आयुक्त और सभी 22 जिलों के उपायुक्तों को इस मामले में ताज़ा ज्ञापन भेजकर तत्काल उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए लिखा है.