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Anant Ambani’s big initiative: केरल के मंदिरों और हाथी कल्याण के लिए ₹18 करोड़ का दान

Anant Ambani's big initiative: Donates ₹18 crore for temples and elephant welfare in Kerala

Anant Ambani’s big initiative: दो प्रमुख मंदिरों को ₹6 करोड़ दान दिया

• राजराजेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए अलग से ₹12 करोड़ दान देंगे

• गुरुवायूर में मंदिर के हाथियों की देखभाल प्रोजेक्ट को समर्थन

 

*मुंबई, 7 अप्रैल, 2026:* रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने केरल के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों राजराजेश्वरम मंदिर और गुरुवायूर मंदिर की यात्रा के दौरान मंदिर संरक्षण और पशु कल्याण से जुड़ी कई पहलों की घोषणा की। उन्होंने दोनों मंदिरों को कुल ₹6 करोड़ का दान दिया और राजराजेश्वरम मंदिर के व्यापक जीर्णोद्धार के लिए ₹12 करोड़ देने की प्रतिबद्धता जताई।

 

अनंत अंबानी ने उत्तर केरल के कन्नूर जिले के तलिपरंबा शहर में स्थित प्राचीन राजराजेश्वरम मंदिर को ₹3 करोड़ का दान दिया। मंदिर के व्यापक जीर्णोद्धार के लिए वे अतिरिक्त ₹12 करोड़ दान देंगे। इस योजना में मंदिर के ऐतिहासिक ईस्ट गोपुरम का पुनर्निर्माण भी शामिल है, जो लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे और पार्किंग व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

 

इसके बाद अनंत अंबानी ने मध्य केरल के त्रिशूर जिले में स्थित प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर में दर्शन किए और मंदिर ट्रस्ट को ₹3 करोड़ का दान दिया। उन्होंने मंदिर परंपराओं से जुड़े हाथियों के कल्याण के लिए अस्पताल, बिना जंजीर वाले आश्रय और आधुनिक देखभाल सुविधाएं विकसित करने की पहल को भी समर्थन देने की बात कही।

 

इन पहलों में हाथियों के लिए समर्पित अस्पताल, बिना जंजीर वाले आश्रय और आधुनिक देखभाल सुविधाएं विकसित करने की योजना शामिल है, ताकि पारंपरिक व्यवस्था के साथ-साथ पशुओं की मानवीय और वैज्ञानिक देखभाल सुनिश्चित की जा सके। यह पहल अनंत अंबानी की वन्यजीव संरक्षण परियोजना ‘वनतारा’ से जुड़े उनके व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।

 

मौके पर मंदिर प्रशासन ने पारंपरिक सम्मान के साथ उनका स्वागत किया। दोनों मंदिरों के देवस्वम बोर्ड के अधिकारी और पुजारी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

 

इस अवसर पर अनंत अंबानी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपराएं केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि समाज, प्रकृति और करुणा को जोड़ने वाली जीवंत संस्थाएं हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।

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