Devastating Floods in China: Thousands Displaced, Cities Submerged
चीन में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के मध्य और दक्षिणी प्रांतों में भारी तबाही मचा दी है। हेनान, हुबेई, गुइझोउ जैसे इलाकों में मूसलधार बारिश के चलते नदियां उफान पर आ गईं और अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 9 लोगों की जान जा चुकी है और 8 से अधिक लोग लापता हैं। हजारों लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा है और कई गांव पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि यह बाढ़ पिछले 60-70 वर्षों में सबसे भयावह और विनाशकारी मानी जा रही है, जिससे चीन में भारी जन-धन की हानि हुई है।
सबसे ज्यादा तबाही गुइझोउ प्रांत के रोंगजियांग काउंटी में देखने को मिली, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कें टूट गईं और पुल बह गए। एक ऐसा भी मामला सामने आया जहां एक ट्रक पुल टूटने के बाद खाई में झूलता रह गया, लेकिन ड्राइवर को चमत्कारिक रूप से बचा लिया गया। प्रशासन ने लगभग 80,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में उन्होंने पहले कभी ऐसी तबाही नहीं देखी। बिजली-पानी की सप्लाई ठप है और कई जगहों पर संचार व्यवस्था भी बिगड़ चुकी है। राहत और बचाव कार्यों में अग्निशमन दल, सैन्य बल और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार जुटी हुई हैं, लेकिन भारी बारिश की वजह से चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं।
सरकार ने इस आपदा को देखते हुए आपातकालीन राहत कोष के तहत 200 मिलियन युआन (लगभग ₹230 करोड़) की राशि जारी की है ताकि प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को तेज किया जा सके। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी व्यापक रूप से लागू किया गया है, जिसमें अब जानवरों और पशुधन को भी मुआवज़े की श्रेणी में शामिल किया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनियमितता और बारिश की तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जो ऐसी आपदाओं को और अधिक विनाशकारी बना रही हैं। इस बाढ़ ने न केवल चीन की आपदा प्रबंधन प्रणाली को चुनौती दी है, बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब हमें पर्यावरण के प्रति और ज़्यादा सजग होने की आवश्यकता है।