Babies Born with Three DNA: Scientific Breakthrough or Ethical Dilemma?
हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में कुछ ऐसे बच्चे पैदा हुए हैं, जिनका डीएनए तीन अलग-अलग लोगों से लिया गया है – माँ, पिता और एक महिला डोनर। इस तकनीक को “माइटोकॉन्ड्रियल रिप्लेसमेंट थेरेपी (MRT)” कहा जाता है, जो मां की दोषपूर्ण माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियों को बच्चे तक पहुंचने से रोकने के लिए अपनाई गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अनुवांशिक बीमारियों को मिटाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
हालांकि, इस तकनीक को लेकर कई वैज्ञानिकों और नैतिक विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। सवाल उठता है कि जब हम डीएनए में बदलाव करने लगते हैं, तो उसकी लंबी अवधि में क्या प्रभाव होंगे? क्या यह इंसानी जीनोम के साथ खिलवाड़ है? साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह तकनीक “Designer Babies” की ओर तो नहीं ले जाएगी, जहां माता-पिता अपने बच्चों के गुण चुन सकें।
इसके बावजूद, यह तकनीक उन माता-पिताओं के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकती है जो गंभीर जेनेटिक बीमारियों के कारण स्वस्थ संतान नहीं पा सकते। यूके में यह तकनीक फिलहाल सीमित अनुमति के तहत ही इस्तेमाल हो रही है। यदि इसे पूरी तरह से सुरक्षित और कारगर माना गया, तो भविष्य में यह पूरी दुनिया में जेनेटिक चिकित्सा का चेहरा बदल सकती है।