Haryana Budget Session: हरियाणा बजट सत्र की तारीख पर आज फैसला, CM सैनी की कैबिनेट मीटिंग; फार्मासिस्ट भर्ती नियमों पर चर्चा
Haryana Budget Session: हरियाणा के बजट सत्र की डेट पर फैसला आज, CM सैनी ने बुलाई कैबिनेट मीटिंग, फार्मासिस्ट भर्ती नियमों पर होगी चर्चा, CMO के पास फाइल
Haryana Budget Session: मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में आज हरियाणा कैबिनेट मीटिंग बुलाई गई है। चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में शाम चार बजे के करीब ये मीटिंग होगी। इस साल की ये दूसरी कैबिनेट मीटिंग होगी। इससे पहले सीएम नायब सैनी ने एक जनवरी को कैबिनेट मीटिंग बुलाई थी। इस दूसरी मीटिंग में मुख्य रूप से बजट सत्र की तारीख पर मुहर लग सकती है। वैसे सूत्रों की मानें तो बजट सत्र की 20 फरवरी से शुरुआत हो सकती है। 25 से 27 फरवरी के बीच बजट पेश किए जाने की संभावना बन रही है।
इस बार बजट सत्र की 12 से 15 बैठकें हो सकती हैं। सत्र की शुरुआत राज्यपाल की अभिभाषण की शुरुआत से होगी। इसके अलावा बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है। इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से फार्मासिस्ट के भर्ती नियमों को मंजूरी दी जा सकती है। इसकी फाइल अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास पहुंची हुई है।
सीएम सैनी का दूसरा होगा बजट
बतौर वित्त मंत्री के नाते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वर्ष 2026-27 का अपना दूसरा बजट पेश करेंगे। पिछला बजट दो लाख पांच करोड़ रुपए के आसपास का था, जो कि इस बार करीब सवा दो लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। पिछले बजट में सीएम नायब सैनी ने लाडो लक्ष्मी योजना को लेकर 5000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था, इस बार के बजट में ये राशि दोगुनी होने के आसार हैं।
फाग से पहले बजट निपटाने की तैयारी
हरियाणा में इस वर्ष होली 4 मार्च को है। सरकार की कोशिश है कि उत्सव से पहले पूरा बजट पारित कर दिया जाए। पिछले वर्ष बजट सत्र 7 मार्च से 28 मार्च तक चला था, लेकिन इस बार समय सीमा 20 मार्च तक सीमित की जा सकती है।
इतिहास बताता है कि बजट सत्र में औसतन 12 बैठकें (सीटिंग्स) होती हैं। इस बार 14 तक बैठकों की संभावना जताई जा रही है। बजट पेश होने के बाद उस पर विस्तृत चर्चा के लिए विधायकों की समितियां भी गठित की जाएंगी।
बीएसी तय करेगी सत्र की कुल अवधि
कैबिनेट मीटिंग में केवल सत्र के आरंभ की तारीख को मंजूरी मिलेगी। सत्र कितने दिन तक चलेगा, इसका निर्णय बाद में विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण की अध्यक्षता में होने वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में होगा, जो विधानसभा के पूरे एजेंडे और कार्यसूची को अंतिम रूप देती है।
फार्मासिस्ट के 568 पद खाली
प्रदेश में फार्मासिस्ट के कुल 1163 स्वीकृत पदों में से 568 पद रिक्त हैं। इसका नतीजा यह है कि कई अस्पतालों में दवा वितरण का कार्य प्रशिक्षु, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या स्टाफ नर्सों से कराया जा रहा है, जिन्हें न तो दवाओं के साल्ट की पूरी जानकारी होती है और न ही उनके विकल्प, डोज या संभावित साइड इफेक्ट की। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
ये है नियम
फार्मेसी अधिनियम 1948 के अनुसार, एक पंजीकृत फार्मासिस्ट के अलावा कोई भी व्यक्ति किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर के नुस्खे पर दवा को तैयार, मिश्रित या वितरित नहीं कर सकता।
फार्मासिस्टों की कमी से दवाओं का वितरण, भंडारण, खरीद, टीकों की कोल्ड चेन बनाए रखना और अन्य तकनीकी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन योग्य कर्मियों के अभाव में यह लक्ष्य अधूरा रह जा रहा है।