स्कूल परिसर में प्रिंसिपल की हत्या पर भड़का रोष, सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट ने की कड़ी निंदा
आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की उठी मांग
हिसार, 11 जुलाई।
गांव बास बादशाहपुर स्थित करतार मेमोरियल स्कूल में प्रिंसिपल जगबीर पानू की दो छात्रों द्वारा चाकू मारकर निर्मम हत्या किए जाने की घटना से पूरा शिक्षा जगत स्तब्ध है। इस जघन्य अपराध की सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट ने कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत सख्त कार्रवाई करते हुए दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।
सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट की ओर से आज एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता ट्रस्ट के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सेठी ने की। बैठक में जिलाध्यक्ष सतबीर गढ़वाल, प्रदेश सचिव अजीत यादव, ईश्वर इंसां, बरवाला ब्लॉक प्रधान रविंद्र जांगड़ा, अग्रोहा ब्लॉक अध्यक्ष श्रवण सांखला, शिव कुमार शर्मा, रामफल जलंधरा, राजेश नियाणा, सुभाष खरड़, धर्मबीर सरसौद, होशियार सिंह ढाणी गारन, राजेश नंगथला, राजबीर भटिवाल व संजय धवन सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
नरेंद्र सेठी ने कहा, “स्कूल परिसर में प्रिंसिपल की इस तरह की नृशंस हत्या अत्यंत निंदनीय है। यह घटना न केवल शिक्षा व्यवस्था पर हमला है, बल्कि शिक्षकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।”
उन्होंने बताया कि यह घटना 11वीं और 12वीं कक्षा के दो छात्रों द्वारा अंजाम दी गई, जिन्होंने स्कूल परिसर में ही चाकू से वार कर प्रिंसिपल की जान ले ली। इस वीभत्स वारदात के बाद स्कूल संचालकों और स्टाफ में भारी रोष और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
नरेंद्र सेठी ने सरकार से मांग की कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्टाफ को सुरक्षित वातावरण देना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट का प्रतिनिधिमंडल सरकार को ज्ञापन सौंपेगा और आवश्यकता पड़ने पर कड़े निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।
यह घटना न केवल शिक्षा प्रणाली पर धब्बा है, बल्कि यह पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि स्कूल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान भी अब खतरे से खाली नहीं हैं। ऐसे में यह समय है कि सरकार तत्काल और सख्त कदम उठाए ताकि शिक्षकों की गरिमा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सके।