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CET Update: तृतीय श्रेणी पदों की सामान्य पात्रता परीक्षा में लागू होगा नॉर्मलाइजेशन का फार्मूला।

CET Update: Normalization formula will be applicable in the general eligibility test for third class posts.

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने 26 और 27 जुलाई को होने वाले कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) में धांधली रोकने के लिए सख्त रुख अपनाया है।

HSSC के चेयरमैन डॉ. हिम्मत सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था एग्जाम पास कराने, नकल कराने या भर्ती में सिलेक्शन कराने के लिए रिश्वत मांगता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

ऐसे मामलों की जानकारी देने के लिए टोल फ्री नंबर 18001802022 जारी किया गया है। मैसेज में सूचना देने के लिए चेयरमैन हिम्मत सिंह के 92162 77773 नंबर और कमीशन के मेंबर भूपेंद्र चौहान के 97739 66556 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

 

डॉ. हिम्मत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह के प्रलोभन में न आएं और बेखौफ होकर धांधली की जानकारी दें।

HSSC सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों से जुड़कर जानकारी जुटा रहा है, ताकि CET को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके।

 

CET के लिए 13 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कमीशन 2 दिन में 4 शिफ्टों में एग्जाम लेगा। इस वजह से कमीशन ने नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू किया है।

इसके तहत सभी कैंडिडेट्स के नंबर, पेपर की कठिनाई के अनुसार बराबर करने के लिए इस फॉर्मूला का इस्तेमाल किया जाएगा।

CET एग्जाम में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले से जुड़े 6 जरूरी सवाल-जवाब…

क्या होता है नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला? जवाब: नॉर्मलाइजेशन एक ऐसा फॉर्मूला है, जिसका यूज विभिन्न शिफ्टों में होने वाले एग्जाम में किया जाता है। इस फॉर्मूले को एग्जाम के अंकों को समान स्तर पर लाने के लिए यूज किया जाता है। इससे एजेंसी यह सुनिश्चित करती है कि सभी छात्रों को समान अवसर मिले, भले ही उनकी परीक्षा का स्तर अलग हो।

क्यों लागू किया जाता है ये फॉर्मूला? जवाब: नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की जरूरत तब पड़ती है, जब कोई एग्जाम एक से ज्यादा शिफ्ट्स में आयोजित की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर शिफ्ट का पेपर अलग हो सकता है, जिससे कुछ छात्रों को आसान और कुछ छात्रों को कठिन पेपर मिल सकता है। नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला, इन अंतरों को दूर करने में मदद करता है और सभी छात्रों को समान स्तर पर आंकने में मदद करता है।

कैसे तय होता है कि पेपर कठिन आया? जवाब: नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले में पेपर की कठिनता तय करने के लिए कुछ विधियां प्रयोग की जाती हैं। इनमें से एक विधि में, परीक्षा के अलग-अलग शिफ्ट या दिनों के पेपरों के कठिनाई स्तर की तुलना करके देखा जाता है कि कौन सा पेपर अधिक कठिन था। दूसरा तरीका यह है कि परीक्षा के अंकों का वितरण देखा जाता है। यदि एक शिफ्ट में अंकों का वितरण कम है, तो यह माना जाता है कि वह शिफ्ट अधिक कठिन थी।

क्या नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले से नंबर कम हो सकते हैं? जवाब: नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला किसी छात्र के स्कोर और रैंकिंग को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। अपने अलग-अलग सत्रों में उम्मीदवारों की ओवरऑल परफॉर्मेंस के आधार पर किसी छात्र का रॉ स्कोर हाई या लो नॉर्मलाइजेशन स्कोर में बदल सकता है।

क्या हरियाणा में पहले भी नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला यूज हुआ? जवाब: हां, हरियाणा में पहले भी CET एग्जाम में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया है। 2022 में कमीशन ने भर्ती परिणाम जारी करते समय इसे अपनाया था। कमीशन ने उस समय तर्क दिया था कि कैंडिडेट्स की संख्या लाखों में होने के कारण ऐसा किया रहा है। साथ ही अलग-अलग शिफ्ट और अलग-अलग पेपर होने के चलते सभी को समान करने के लिए इसे अपनाया जा रहा है।

हरियाणा में क्या नॉर्मलाइजेशन का हो चुका विरोध? जवाब: हां, हरियाणा में 2022 में हुए CET एग्जाम के दौरान विरोध हुआ था। इसके विरोध में युवाओं ने पंचकूला में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के बाहर धरना तक दिया था। युवाओं की मांग थी कि एक पद के लिए एक ही पेपर हो और पहले की तरह अंकों के आधार पर ही चयन हो।

 

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