Trump–Zelenskyy Summit Broadens Russia-Ukraine Peace Talks to Include Europe
व्हाइट हाउस में सोमवार को आयोजित यह बैठक यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक द्विपक्षीय समन्वय से कहीं आगे की अवधारणा है। इस बार ज़ेलेंस्की अकेले नहीं आए थे—उनके साथ फ्रांस, यूके, जर्मनी, इटली, फिनलैंड, यूरोपीपीय आयोग और NATO के महासचिव भी अमेरिका पहुँचे—जिससे यह वार्ता एक शक्तिशाली गठबंधन का रूप ले रही है।
ट्रम्प की मुखरता से यह बैठक एक निर्णायक मोड़ पर पहुँची है, जब उन्होंने ट्विटर और Truth Social पर लिखकर कहा कि “ज़ेलेंस्की युद्ध ‘almost immediately’ समाप्त कर सकता है, यदि वह दो शर्तों को स्वीकार करे: NATO में शामिल न होना और Crimea को वापस न मांगना”। यह बयान यूक्रेन की संप्रभुता के लिए एक सीधी चुनौती है।
ज़ेलेंस्की ने तुरंत प्रतिक्रिया दी—”शांति टिकाऊ होनी चाहिए, पिछले ढर्रे की तरह नहीं जब Crimea और Donbas खो दिए गए थे”—और उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी ऐसा समझौता जिसे रूस नए आक्रामक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करे, उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यूरोपीय नेता इस बैठक में सिर्फ सामूहिक उपस्थिति के लिए नहीं आए—उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति तभी न्यायसंगत और टिकाऊ होगी जब उसकी नींव त्याग की नहीं बल्कि सुरक्षा और सम्मान की हो। उन्होंने USA से NATO-जैसे सुरक्षा गारंटी देने पर जोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि Ukraine पर किसी भी नए आक्रमण की स्थिति में पश्चिम समर्थन में खड़ा होगा।
इसके बीच, युद्ध की भयावहता अभी भी जारी है—Kharkiv पर एक भीषण ड्रोन हमले में छह नागरिकों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा और एक किशोर भी शामिल थे।यह दिखाता है कि युद्ध जल्दी नहीं थमेगा, चाहे कितनी भी कूटनीतिक पहलें हों। इसलिए वार्ता अनुरोध सिर्फ ज़मीनी रुकावटों को मिटाने का नहीं, बल्कि उन सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने का माध्यम हो।
इस बैठक का राजनीतिक और रणनीतिक महत्व गहरा है—यह पश्चिमी एकता की परीक्षा भी है। क्या यूरोपीय-यूएस गठबंधन वास्तव में यूक्रेन की रक्षा करता हुए टिकाऊ शांति की दिशा में कदम बढ़ा पाएगा, या फिर किसी दबाव के आगे पीछे हट जाएगा? इसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए निर्णायक रहेंगे।